कहां भाग गया डी.पी. सिंह?

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एनएच-74 घोटाले का मुख्य आरोपी
कहीं विदेश तो नहीं भाग गया घोटालेबाज!
देहरादून। उत्तराखण्ड के उधमसिंहनगर में एनएच-74 में हुए कई सौ करोड के घोटाले की जांच भले ही सरकार सीबीआई से कराने में डरी हुई नजर आ रही हो लेकिन मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अब तक इस मामले में आठ आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया लेकिन घोटाले के मुख्य आरोपी डीपी सिंह को खोज निकालने में एसआईटी अब तक नाकाम साबित हुई है ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार कहां भाग गया डीपी सिंह? अब अफसरशाही में यह भी चर्चाएं होने लगी हैं कि कहीं डीपी सिंह विदेश तो नहीं भाग गया? हालांकि एसआईटी दावा कर रही है कि डीपी सिंह भारत में ही है जिसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। हैरानी वाली बात है कि अगर पुलिस को किसी के घर की कुर्की लेनी होती है तो वह न्यायालय में याचिका दाखिल कर 82-83 जल्द ले लेती है लेकिन इस मामले में वह नियम के अनुसार चलने का जिस तरह से दावा कर रही है उस तरह से साफ है कि अभी डेढ दो माह तक एसआईटी की टीम को डीपी सिंह के घर की कुर्की का आदेश लेने में लग जायेंगे?
उल्लेखनीय है कि बीते रोज एसआईटी के सीओ स्वतंत्र सिंह के नेतृत्व मंे एसआईटी की टीम ने देहरादून में डीपी सिंह के कुछ ठिकानों पर छापेमारी की लेकिन पहले से ही तय माना जा रहा था कि डीपीसिंह दून में किसी भी कीमत पर नहीं हो सकता। ऐसे में सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार डीपी सिंह कहां भाग गया? डीपी सिंह को पकडने के लिए एसआईटी ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है लेकिन जिस तरह से पुलिस को चकमा देकर डीपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की थी उससे साफ हो गया था कि डीपी सिंह भारत में ही कहीं अपना ठिकाना बनाये हुए हैं लेकिन एसआईटी की टीम के हाथ उस पर क्यों नहीं पहुंच पा रहे हैं यह काफी हैरान करने वाली बात है। अब तो इस बात को लेकर भी बहस छिड गई है कि कहीं डीपी सिंह विदेश तो नहीं भाग गया? हालांकि पुलिस एसआईटी की टीम ने डीपी सिंह का लुकऑउट नोटिस जारी करने में काफी समय लगा दिया था जिसके चलते यह आशंका पनप रही है कि कहीं डीपी सिंह अपने लुकऑउट नोटिस जारी होने से पहले ही विदेश तो नहीं भाग गया था? गौरतलब है कि एसआईटी की टीम ने इस घोटाले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है लेकिन सरकार पर बार-बार रूद्रपुर के पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ आरोप लगाते आ रहे हैं कि आर्विटेशन के सहारे कुछ आईएएस व चंद राजनेताओं ने बडा घोटाला किया था उसकी जांच न तो सरकार कराने के लिए आगे आ रही है और न ही एसआईटी ने इसे अपनी जांच में शामिल किया है। तिलकराज बेहड का खुला आरोप है कि जिन बडे आईएएस अफसरों ने इस घोटाले में अपने हाथ रंगे हुए हैं वह आज भी भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दम भरने वाली सरकार में उच्च पदों पर आसीन हो रखे हैं। सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार सरकार न तो इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए आगे आना चाहती है और न ही आर्विटेशन के द्वारा करोडो रूपये का बडा भ्रष्टाचार करने वाले कुछ आईएएस अफसरों व राजनेताओं को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए उनकी जांच कराने का हुकम दे रही है? ऐसे में यह साफ है कि एनएच-74 घोटाले में डीपी सिंह के अलावा बहुत बडे-बडे सफेदपोश व कुछ आईएएस अफसर भी शामिल हैं जिन्हें सरकार में बैठे कुछ लोग बचाने का तानाबाना बुने हुए हैं और यह घोटाला मात्र डीपी सिंह व आठ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से बंद हो जायेगा ऐसा भी सम्भव नहीं लग रहा है?

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