बल्लीवाला फ्लाई ओवर में हो रही मौतों के सौदागर कौन: नेगी

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विकासनगर/देहरादून। जनसंघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुखिया विजय बहुगुणा व तत्कालीन महाधिवक्ता यू के उनियाल ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वारिन घोष को गुमराह कर कम्पनी से मोटी रकम लेकर ब्लैक लिस्टेड कम्पनी के खिलाफ दायर जनहित याचिका को ही खारिज करा दिया था।
यहां एक होटल में पत्रकारों से रूबरू होते हुए नेगी ने कहा कि जनता के हितों को लेकर मोर्चा द्वारा उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गयी थी, जिसमें तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुखिया विजय बहुगुणा द्वारा साठगॉंठ कर 4 लेन के फ्लाई ओवर को बिना टेण्डर प्रक्रिया अपनाये व उस फ्लाई ओवर को 2 लेन में परिवर्तित किये जाने को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उस वक्त मोर्चा द्वाा सड़क पर भी आन्दोलन चलाया गया थ कि इस प्रकार के 2 लेन फ्लाई ओवर से लोगों के जीवन से खिलवाड़ हो सकता है क्योंकि यह ईपीआईएल कम्पनी ब्लैक लिस्टेड कम्पनी है तथा उक्त फ्लाई ओवर को 4 लेन का ही बनाया जाए।
नेगी ने हैरानी जताकर देश का दुर्भाग्य बताया है कि महाधिवक्ता उनियाल ने उक्त फ्लाई ओवर सम्बन्धी जॉंच को अलग दिशा में उच्च न्यायालय को गुमराह कर मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी की ही जॉंच करा दी। उनका कहना है कि उक्त जॉंच में पूरी सरकार लगी तथा न्यायालय ने भी अपनी नज़र टेडी की लेकिन बावजूद इसके रघुनाथ सिंह नेगी मोर्चा अध्यक्ष को क्लीन चिट देनी पड़ी।
नेगी ने कहा कि न्यायालय ने अन्त में यह कहकर याचिका खारिज कर दी कि याचिकाकर्ता राजनीतिक व्यक्ति है। उनका कहना है कि काश न्यायालय को गुमराह न किया जाता तो इन मौतों को रोका जा सकता था, लेकिन मोर्चा को डर है कि ये फ्लाई ओवर अभी न जाने कितनी जिन्दगी तबाह करेगा।

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