करवाचौथ के दिन भी आशा कार्यकर्त्रियांें का धरना

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देहरादून। वेतन भुगतान सहित अनेक मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए धरना दिया। उनका कहना है कि सरकार की जन विरोधी नीतियों का पुरजोर तरीके से विरोध किया जायेगा। उनका कहना है कि सरकार उनके हितों के लिए गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार को कोसते हुए कहा कि सरकार ने अभी तक उनके हितों के लिए कोई कार्य नहीं किया है। वहीं करवाचौथ त्यौहार पर भी आशा कार्यकर्त्रियां धरने पर रही।
यहां धरना स्थल पर उत्तराखंड आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन की अध्यक्ष शिवा दूबे के नेतृत्व में अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते कर धरना दिया और कार्यकर्त्रियों ने कहा कि सरकार उनके हितों के लिए गंभीर नहीं दिखाई दे रही है जो चिंता का विषय है। उनका कहना है कि सरकार के रवैये से वह नाराज है और राजधानी में शीघ्र ही भूख हड़ताल शुरू कर दी जायेगी। उनका कहना है कि अब सरकार के खिलाफ आर पार की लडाई लडी जायेगी। उनका कहना है कि इसके लिए जल्द ही रणनीति तैयार की जायेगी।
उनका कहना है कि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को तेज किया जायेगा। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को तेज किया जायेगा। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि अन्य स्कीम वर्करों की भांति आशाओं को भी न्यूनतम वेतन व मानदेय दिया जाना चाहिए, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है। वक्ताओं का कहना है कि सन 2012-13, 2013-14, 2015-16, 2016-17 चारों की पांच हजार रूपये प्रति वर्ष प्रोत्साहन राशि को एक मुश्त भुगतान अविलंब किया जाये।
उनका कहना है कि सरकार अभी तक इस दिशा में गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। उनका कहना है कि आशा कार्यकर्त्रियों को बोनस का भुगतान तत्काल प्रभाव से किया जाये और 45वें श्रम सम्मेलन के फैसले के अनुसा आशा कार्यकर्त्रियों को कर्मकार घोषित किया और वर्तमान समय में बढती हुई महंगाई को देखते उनके भत्तों में महंगाई के अनुरूप बढोत्तरी की जाये।
उनका कहना है कि पूर्व में मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य महानिदेशक को अवगत कराये जाने के बाद भी आज तक समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है जिससे उनमें रोष बना हुआ है। उनका कहना है कि उनके हितों के लिए किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। इस अवसर पर अनेक आशायें मौजूद थी।

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