वन विकास निगम में भ्रष्टाचारी अधिकारी सुहाग

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कर्मचारियों ने हटाने की मांग की, 10 से धरना
देहरादून। उत्तराखंड वन विकास निगम कर्मचारी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पूरन सिंह बिष्ट ने कहा है कि वन विकास निगम में भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारी होंगें तो निगम तरक्की नहीं कर सकता है। उनका कहना है कि महाप्रबंधक कुमायूं जे एस सुहाग द्वारा कई अनियमितताओं की शिकायत किये जाने के बाद भी उन्हें हटाया नहीं जा रहा है, जिसके लिए जनांदोलन किया जायेगा।
यहां परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से रूबरू होते हुए बिष्ट ने कहा है कि वन विकास निगम मंे प्रस्तावित भर्ती जिसके संयोजक व अध्यक्ष जे एस सुहाग ही थे और उस भर्ती प्रक्रिया में अधिप्राप्ति नियमावली को दर किनार कर मनमाने ढंग से कोटेशन के माध्यम से परीक्षा हेतु एजेंसी नियुक्ति कराकर उसे 54 लाख का अग्रिम भुगतान भी करा दिया गया है जबकि वन विकास निगम की भर्ती प्रक्रिया को उच्च न्यायालय द्वारा रोक दिया गया है और इसी प्रकार कुमायूं क्षेत्र में विभिन्न प्रभागों के लिए अनावश्यक रूप से केवल कोटेशन के आधार पर 1102400.00 में पावर वैन सौ क्रय कर ली गई है जिसकी किसी प्रभाग व क्षेत्र में कोई मांग नहीं थी और जिनका वन विकास निगम में कोई उपयोग नहीं होने के कारण वह पावर वैन सौ गोदामों में जंग खा रही है।
उनका कहना है कि इसी प्रकार वर्तमान में जीएसटी की व्यवस्था लागू होने पर इनके द्वारा प्रबंध निदेशक द्वारा अन्य लोगों को आवंटित जीएसटी कार्य को रोककर मनमाने ढंग से कोटेशन के माध्यम से 10ऋ11 लाख में होने वाले कार्य को प्रदेश से बाहर केसनदी लेखाकार को लगभग 40 लाख में कार्य आवंटित कर दिया गया है और इस कार्य को अंजाम देने के लिए डेढ माह तक निगम के डिपुओं को बंद कर लगभग 50 करोड की बिकी और इससे प्रदेश व केन्द्र सरकार को मिलने वाले राजस्व को प्रभावित यिका गया है और दून के होटलोें में बैठकें दिखाकर निगम का लेशमात्र का काम नहीं किया जाता है और इससे निगम को लाखों रूपये का चूना अलग से लगाया जा रहा है और अपने चहेते अधिकारियों की विभाग में तैनाती कराकर गौला में तौल कांटों में हेराफेरी कराने के कारण ही तौल कांटों की निविदा को उच्च न्यायालय में चुनौती देकर अन्य निविदादाताओं द्वारा स्थगन ओदश प्राप्त किया गया है जिससे एक अक्टूबर से प्रारंभ होने वाले गौला खनन को कार्य निकट भविष्य में भी जल्दी शुरू नहीं होने से लगभग एक करोड से अधिक का राजस्व प्रतिदिन प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि संगठन को यह भी आशंका है कि अभी भी जीएसटी आदि के नाम पर साफ्टेयर बनाने के नाम पर करोडों का खेल खेला जा सकता है इसलिए इनको तत्काल निगम से हटाने के संबंध में सरकार व उच्च अधिकारियों को अनेकों बार अवगत कराये जाने के बाद भी सिकी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है। उनका कहना है कि शीघ्र ही इस पर कार्यवाही नहीं की गई तो दस अक्टूबर से निगम मुख्यालय पर चार दिवसीय धरना प्रदर्शन किया जायेगा। इस अवसर पर अनेक कर्मचारी नेता मौजूद थे।

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