शिक्षकों ने निदेशक पर लगाये गंभीर आरोप

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देहरादून। महिला प्रौद्योगिक संस्थान अब युद्ध का मैदान बनता जा रहा है और जहां संस्थान की निदेशक डा. अलकनंदा अशोक पर पिछले डेढ वर्ष से मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न किये जा रहे है और शासन स्तर तक शिकायत करने के बाद भी आज तक उन पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। वहीं अब फैकल्टियों ने भी निदेशक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी कार्यप्रणाली पर जांच किये जाने की मांग की है।
यहां परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में पत्रकारों से रूबरू होते हुए सहायक प्रोफेसर भूपेश सिंह ने कहा है कि निदेशक डा. अलकनंदा अशोक द्वारा पिछले डेढ वर्ष से मानसिक एवं आर्थिक उत्पीड़न किये जा रहे है और शासन स्तर तक शिकायत करने के बाद भी आज तक उन पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। वहीं अब फैकल्टियों ने भी निदेशक के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी कार्यप्रणाली पर जांच किये जाने की मांग की है। उनका कहना है कि बीते दिनों सभी शिक्षक, लैब तकनीशियन एवं स्टाफ को बायोमैट्रिक हाजिरी बंद कर एवं उपस्थिति पंजिका को जबरन हाथ से छीन लिया गया और बार बार शासन की धमकी दी गई व यहां तक की नौकरी से निकालने की बात कहती रहती है और जब विरोध किया तो हमें लगातार डराने धमकाने का काम किया जा रहा है।
उनका कहना है कि निदेशक के आये दिन तानाशाही और मनमाने रवैये से तंग आ चुके है, उनका आरोप है कि किसी उंची पहंुच का फायदा उठाकर शोषण किया जा रहा है। उनका कहना है कि डा. अशोक दस बारह वर्षों से अपने मूल संस्थान में किसी भी तरह का योगदान नहीं दिया जा रहा और वह गलत तरीके से नियम विरूद्ध प्रति नियुक्तियों पर हमेशा बडे बडे प्रशासनिक पदों पर लाभान्वित होती रही है। उनके इस तानाशाही आचरण की शिकायतें करने के बाद भी कार्यवाही नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि गर्भवती महिला शिक्षकों के साथ अमानवीय व्यव्हार किया जाता है और मेडिकल लीव पर गई महिलाओं को वापस बुलाकर ज्वाइनिंग नहीं दिया जाता और सबूतों को नष्ट करना, छात्राओं के सामने शिक्षकों को तरह तरह से अपमानित करना, अकारण वेतन काट दिया जाता है।
उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की प्रयोगात्मक परीक्षा में जाने से रोकना, उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करने की अनुमति न देना, किसी भी वर्कशॉप व कान्फ्रेस में न जाने देना, छोटी छोटी बात पर हिंसक होना, पीएचडी स्कोलर्स का तरह तरह से मानसिक उत्पीडन करना, निदेशक के खुद के आने व न जाने
का कोई समय नहीं और यूटीयू के भवन में पीने के पानी, शौचालय की सुविधा का उपयोग न होना, शिक्षकों के मतभेद उत्पन्न करने के लिए आपस में एक दूसरे को नोटिस जारी करने के लिए दवाब बनाये जाने सहित स्वयं का वेतन निर्गत करना, एक साल में तीन बार वेतन बढोत्तरी, राज्यपाल के आदेश के बावजूद न्यूनतम वेतनमान शिक्षकों न देेना, चहेतों के वेतन में नियम विरूद्ध बढोत्तरी करना, सरकारी धन का उपयोग करना और वेतनमान में अनियमिता करना है, उनके द्वारा वित्तीय अनियमितता की गई है और लगातार पद का दुरूपयोग किया जा रहा है जो उचित नहीं है। इस अवसर पर वार्ता में अभिषेक भारती, आकांक्षा, संदीप कुमार आदि मौजूद थे।

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