हल्की सरकार भ्रष्टाचारों पर खामोश!

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एनएच घोटाले पर सरकार ने साध ली ‘चुप्पी’
मंत्री के खत-फाइल भी हो रही शासन में कैद?
देहरादून। उत्तराखण्ड में छह माह पूर्व सत्ता की कमान संभालने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ऐलान किया था कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस अपनाया जायेगा और विकास की गति को तेज किया जायेगा। सरकार के इस दावे से आवाम के चेहरे खिले थे कि डबल इंजन की सरकार राज्य में अब विकास ही विकास करेगी लेकिन हैरानी वाली बात है कि जब कुमांऊ के पूर्व कमीश्नर ने सैकडों करोड रूपये के एनएच घोटाले का पर्दाफाश किया तो वहां के तत्कालीन डीएम पर सबसे पहले गाज गिरा दी गई और उसके बाद कुमांऊ के पूर्व कमीश्नर को हटाकर सरकार ने साफ संदेश दे दिया था कि वह किस दिशा की ओर अपने कदम आगे बढायेगी। एनएच घोटाले की मीडिया व सदन के अन्दर सीबीआई से जांच कराने का दम भरने वाले सीएम के सामने ऐसा कौन सा कारण आ खडा हुआ कि उन्होंने इतने बडे घोटाले की जांच सीबीआई से कराने के लिए अब खामोशी साध ली है? इतना ही नहीं कांग्रेस शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार व घोटालों पर भी सरकार ने जिस तरह से पर्दा डालना शुरू किया है उससे उनके चंद विधायक भी खासे नाराज नजर आ रहे हैं और अब तो यह आरोप भी लगने लगे हैं कि हल्की सरकार ने भ्रष्टाचार व घोटालों पर भी खामोशी साध ली है? छह माह में भले ही राज्य के अन्दर विकास की कोई गति देखने न मिली हो लेकिन अमित शाह के दून आगमन पर सरकार ने उनके आने-जाने वाले स्थल मार्गों पर जिस तरह से पानी की तरह पैसा बहाया है उससे आवाम के मन में एक बडी नाराजगी है कि उन्होंने जब आन्दोलन व धरना प्रदर्शन किया तब तो शहर की सडकों पर गढ्ढे नहीं भरे गये लेकिन अमित शाह के आने की खबर से शहर के गढ्ढे तो भरे ही साथ में रंग-रोगन से भी शहर को चमकाया गया लेकिन यह चमक आवाम के मन में नहीं उतर पायेगी क्योंकि उसे इल्म है कि यह सबकुछ कुर्सी बचाने के लिए हुआ है?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड सरकार की कमान त्रिवेन्द्र रावत को सौंपी गई थी तो उन्होंने ऐलान किया था कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस अपनाया जायेगा लेकिन सबसे पहले सरकार की उस समय जीरो टॉलरेंस को लेकर अग्नि परीक्षा हो गई जब तत्कालीन कुमांऊ कमीश्नर डी. सेंथिल पांडियान ने एनएच-74 घोटाले का पर्दाफाश कर खुलासा किया था कि सैकडों करोड रूपये का घोटाला हुआ है। इस मामले को आगे बढाने वाले तत्कालीन उधमसिंहनगर डीएम चंद्रेश यादव को सरकार ने ईनाम देने के बजाए सबसे पहले डीएम पद से हटा दिया था तथा उसके चंद दिन बाद ही पूर्व कमीश्नर को भी हटाने का हुक्म जारी कर दिया था। भ्रष्टाचार पर नकेल लगाने का ईनाम जिस तरह से इन दो अधिकारियों को भुगतना पडा उससे राज्य की जनता के अन्दर सरकार को लेकर जो संदेश गया वह 2019 में भाजपा के लिए काफी घातक हो सकता है? सरकार का हल्कापन इसी बात से नजर आ गया था कि जब मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने मीडिया के सामने ऐलान किया था कि एनएच-74 घोटाले की जांच सीबीआई करेगी लेकिन केन्द्रीय मंत्री नीतिन गडकरी के पत्र के बाद जिस तरह से सरकार के मुखिया ने खामोशी साधी वह किसी से छिपा नहीं रहा? सदन के अन्दर तक सरकार के मुखिया ने इस घोटाले की जांच सीबीआई से कराने का दम भरा था लेकिन उसके बावजूद भी सैकडों करोड घोटाले की जांच सीबीआई से कराने के लिए सरकार ने कोई पहल नहीं की? इतना ही नहीं जिस तरह से चंद ईमानदार अफसरों को खामोशी बस्ते में डालने का काम सरकार ने किया है वह सरकार की मंशा पर पहले ही सवाल खडे कर चुका है। शासन में चंद विवादित अफसरों को तैनाती दिये जाने पर सरकार पहले ही आवाम के निशाने पर है। इससे बडा मजाक क्या हो सकता है कि हरिद्वार से भाजपा के चार विधायक मुख्य सचिव से इस बात को लेकर मिले कि छात्रवृत्ति घोटाले की जांच धीमी पड गयी है और इस मामले की जांच में तेजी लाई जाये। हैरानी वाली बात है कि कैबिनेट व संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने एक विभाग के एमडी के हुए भ्रष्टाचारी स्टिंग की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने के लिए मुख्यमंत्री को लम्बे समय पूर्व एक खत लिखा था लेकिन यह खत शासन की कौन सी अलमारी में कैद हो गया यह आज तक रहस्य बना हुआ है? इतना ही नहीं एक-दो मंत्रियों की तो यहां तक पीढा दिखी कि उनकी फाइलों को अलमारियों में कैद किया जा रहा है और एक मंत्री की तो फाइल गायब होने की भी चर्चाएं पिछले समय आम हुई थी? सवाल यह है कि आखिरकार आज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सरकार का किस बात को लेकर छह माह का रिपोर्ट कार्ड देखने आए हैं? सवाल तैर रहे हैं कि क्या राज्य में कोई ऐसा मंत्री है जिसने राज्यहित में विकास के लिए अपने कदम आगे बढाये हों? उत्तराखण्ड में छह माह की सरकार के अन्दर जिस पर हजारो करोड रूपये का कर्ज है वह कैसे अपने चंद मंत्रियों व अफसरों को सरकारी खजाने से विदेश भेजने के लिए आगे आई है। अमित शाह को अगर राज्य की सही तस्वीर देखने है तो वह होटल में होने वाली समीक्षा व मुख्यमंत्री के साथ होने वाले रात्रि भोज में नहीं दिख सकती? इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को गोपनीय रूप से अपनी टीम से सच्चाई का आंकलन कराना होगा कि क्या उत्तराखण्ड में डबल इंजन की सरकार है या फिर जुमलों में ही सरकार विकास कर रही है?

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