शाह की प्रेस में होगा अपना मीडिया!

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देहरादून। उत्तराखण्ड में प्रचंड बहुमत वाली भाजपा सरकार व संगठन के बीच जो कुछ अन्दरखाने चल रहा है उसकी गूंज राज्य के गलियारों में भी सुनने को मिल रही है। हैरानी वाली बात है कि पहली बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का दून आगमन हुआ है और सरकार व संगठन के कुछ लोगों में अमित शाह की प्रेस कान्फ्रेंस को लेकर इतना डर बना हुआ था कि उन्होंने इसमें सिर्फ अपनी मीडिया को ही शामिल करने के लिए खाका तैयार किया? डर इस बात का था कि अगर कहीं कुछ मीडियाकर्मियों ने अमित शाह को उत्तराखण्ड में हो रहे भ्रष्टाचार व घोटालों की सच्चाई से रूबरू करा दिया तो उससे सरकार व संगठन का रिपोर्ट कार्ड दागदार न हो जाये? यही कारण रहा कि उस मीडिया को इस कान्फ्रेंस से दूर रखा गया है जो सरकार व संगठन को हमेशा सच्चाई का आईना दिखाते आ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार व संगठन ने अपनी मीडिया को वो पाठ पढा दिया है जिसे सुनकर राष्ट्रीय अध्यक्ष सरकार के कामकाज को लेकर उसे क्लीन चिट दे दें?
हैरानी वाली बात है कि एक ओर तो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश से भ्रष्टाचार खत्म करने का दम भर रहे हैं वहीं राज्य में कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार पर सरकार आंखे बंद करके बैठ गई है जिसको लेकर सरकार कटघरे में है। सरकार के छह माह के कार्यकाल में राज्य के अन्दर ऐसा कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिला जिससे कि अमित शाह सरकार व मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड को पैमाना मानकर उन्हें क्लीन चिट दे दें? गजब बात तो यह है कि जो भाजपा भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का राग अलाप रही है उस सरकार व उसके संगठन को ऐसा क्या डर सता गया कि अमित शाह की कल होने वाली प्रेस कान्फ्रेंस में अपनी मीडिया को ही आमंत्रित किया गया और जिन्होंने सवाल दागने हैं उनमें से अधिकांश के कानों में ऐसा मंत्र फूंका गया है कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष से वो सवाल न करें जिससे सरकार पर आंच आये? अपनी मीडिया के सहारे सरकार अमित शाह के सामने भले ही अपने आपको साफ-सुथरी सरकार का तमका लेने में सफल हो जाये लेकिन आवाम के मन में सरकार की कथनी और करनी को लेकर जो नाराजगी है वह शायद अमित शाह के सामने इसलिए न आ पाये क्योंकि अपनी मीडिया को तो वही एजेंडा दिया गया होगा जो सरकार व संगठन चाहती है? अगर अपनी मीडिया से ही अमित शाह को रूबरू कराना था तो फिर इसे प्रेस कान्फ्रेंस का नाम देना उचित नहीं हो सकता? सिर्फ अपने गुणगान के लिए अपनी मीडिया को ही अमित शाह के सामने प्रस्तुत कर सरकार व संगठन के कुछ नेताओं ने जिस तरह से यह खेल खेला है वह देश के प्रधानमंत्री के लिए भी शुभ संकेत नहीं हो सकते? सोशल मीडिया पर जिस तरह से आये दिन सरकार को लेकर राज्य की जनता को आईना दिखाया जा रहा है अगर उस सोशल मीडिया का आंकलन अमित शाह अपनी आंखों से कर लें तो उन्हें पता चल जायेगा कि राज्य में प्रचंड बहुमत वाली सरकार किस एजेंडे पर चल रही है?

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