ठाकुर नेताओं की मुलाकात मे राज!

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तो क्या अमित शाह को सरकार दे रही चुनौती?
देहरादून। उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री व ठाकुर नेता हरीश रावत को जो भाजपा हर जनसभा में भ्रष्टाचार व घोटालों को लेकर उनकी घेराबंदी करती थी। उत्तराखण्ड में भाजपा सत्ता में आई तो सरकार के मुखिया का पूर्व मुख्यमंत्री से बीमारी का हाल पूछने के लिए हो रही मुलाकातों में क्या राज छुपा है इसको लेकर भाजपा के अन्दर भी एक भूचाल मचा हुआ है? सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या सरकार अमित शाह को चुनौती दे रही है क्योंकि दो ठाकुर नेताओं की बार-बार मुलाकातों के दौर के यही राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं?
उल्लेखनीय है कि हरीश रावत से बगावत कर कांग्रेस के नौ विधायकों ने जब भाजपा विधायकों के साथ विधानसभा सदन में अपनी आस्था दिखाई थी तो उसके बाद हरक सिंह रावत व उनके नौ विधायकों ने कांग्रेस का दामन छोड दिया था। इन पूर्व विधायकों को भाजपा में शामिल न होने देने के लिए पार्टी के चंद नेताओं ने बडा शोर मचाया था लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस छोडने वाले सभी राजनेताओं को दिल्ली में भाजपा की सदस्यता दिलाई थी और सभी को विधानसभा चुनाव का टिकट देकर यह साबित कर दिया था कि वे पार्टी के सर्वेसर्वा हैं। उत्तराखण्ड के विधानसभा चुनाव से पूर्व देश के प्रधानमंत्री से लेकर अमित शाह तक हरीश रावत को भ्रष्टाचार व घोटालों पर घेरते रहे और जैसे ही राज्य में भाजपा की सरकार बनी तो सरकार के मुखिया व हरीश रावत के बीच हुई चंद मुलाकातों से भाजपा व कांग्रेस छोडकर आये विधायकों में भी भूचाल मचा हुआ है? कभी दो ठाकुर नेताओं की दिल्ली में मुलाकात हुई तो कभी हरीश रावत के बीमार होने की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री प्रदेश अध्यक्ष के साथ उनके आवास पर दौडते चले गये। राजनीतिक गलियारों में दो ठाकुर नेताओं की मुलाकातों को लेकर कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं? बता दें कि हरीश रावत कांग्रेस छोडकर आये विजय बहुगुणा कैम्प से 36 का आंकडा रखते हैं और उन्होंने चुनाव से पूर्व यहां तक दावा कर दिया था कि वह कांग्रेस छोडकर आये किसी भी नेता को विधानसभा का चुनाव नहीं जीतने देंगे लेकिन केदारनाथ की पूर्व विधायक को छोडकर सभी नेता चुनाव जीत गये। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कहीं हरीश रावत सरकार के मुखिया से नजदीकी बनाकर उनका इस्तेमाल विजय बहुगुणा कैम्प को पार्टी में ही ढेर करने के लिए तो नहीं कर रहे हैं? आने वाला समय ही बतायेगा कि दो ठाकुर नेताओं की अकसर चल रही मुलाकातों के पीछे क्या राज छिपा है?

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