खाकी के साये में टैक्स वसूली!

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किसकी शह पर सड़कों पर पर्यटकों से मांगा जा रहा रोड़ टैक्स?
सी.ओ. तक को नहीं मामले की जानकारी
देखो सी.एम. साहब अल्मोड़ा में खाकी का हाल
अल्मोड़ा। पुलिस महकमें में ईमानदार छवि रखने वाले डीजीपी शासन के आदेशों का पालन करने का पुलिस महकमें को पाठ पढा चुके हैं लेकिन हैरानी वाली बात है कि अल्मोडा पुलिस डीजीपी के बताई डगर पर नहीं चल रही है? अगर पुलिस डीजीपी के आदेश पर चल रही होती तो अल्मोडा में आने वाले पर्यटकों से पुलिस के साये में एक अनजान कंपनी टैक्स वसूलती हुई नजर नहीं आती? ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अल्मोडा पुलिस डीजीपी से बडी है जो जनपद में अपना ही कानून चला रही है?
पर्यटक नगरी के नाम से जाना जाने वाला शहर आज पर्यटकों को क्या दे रहा है? ये एक सोचने वाला विषय भी बन गया है। जागेश्वर श्रावण मेले के कारण अल्मोड़ा शहर पर्यटकों से भरा हुआ है। ऐसे में जहां प्रशासन पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कहता है वहीं शहर में आते हि पर्यटकों को भरना पड़ रहा है अर्थ दंड। शहर में लगातार पर्यटकों को शहर में आने के लिए 100 रुपयों का अर्थदंड देना पड़ रहा है। इस बार उसका नाम रिफ्लेक्टर रखा गया है। एक अनजान सी कंपनी लोगों को रोक कर उनसे 100 रुपया वसूलने में लगी हैं। इस कंपनी का साथ अल्मोड़ा की पुलिस दे रही है। पुलिस के कर्मचारी लोगों के वाहनों को रोक कर लोगों को रिफ्लेक्टर लगाने को बोलते नजर आ रहे हैं। रिफ्लेक्टर के नाम पर 2 स्टिकर आगे और 2 स्टिकर पीछे लगा दिये जा रहे हैं।
वाहनों के लिए कंपनी उसको एक चेसिज नम्बर देती हैं। पर कंपनी ने बोनट के अंदर गाड़ी का नम्बर लिखना भी अनिवार्य किया हुआ हैं। अब बात आती है क्या ये नियम केवल अल्मोड़ा के लिए ही आता है? इस मामले में अल्मोड़ा के सी.ओ. ने तो “ इसके बारे में पता न होना बता दिया है”। तो आखिर किसके आदेश से हो रहा है ये गोरख धंधा? अल्मोड़ा में क्या मुख्यमंत्री, डी जी पी उत्तराखंड के आदेश भी अलग होते हैं? मुख्यमंत्री को अब ये जवाब भी अल्मोड़ा की जनता को देना होगा कि क्या पूर्ण बहुमत देना अल्मोड़ा की जनता की कोई गलती थी? या ये कहे कि पुलिस की कार्यवाही अब बीजेपी सरकार से अलग हो गई है। अगर ये काम किसी कंपनी ने लिया है तो वो खुद क्यों नहीं करती? आखिर पुलिस के कर्मचारियों को क्यों लगाया जा रहा है?
पहले भी क्राइम स्टोरी इस खबर को लिख चुका है पर इस पर ना तो कोई पुख्ता कार्यवाही हुई है ना ही पर्यटकों को कोई राहत हुई। जब आला अधिकारी ये कहते हैं कि उन्हें मामले की कोई जानकारी नहीँ तो किसके आदेश पर उनके अधीनस्थ कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं? लगातार जनता से ये लूट क्यों हो रही हैं। और कोई भी अधिकारी इसकी जवाब दे क्यों नहीं रहा है? पुलिस महकमे के अधिकारी एक छोटी से भी कामयाबी का तो बहुत व्याख्यान करते हैं पर मित्र कही जाने वाली पुलिस जनता की लूट के समय जनता के साथ क्यों नज़र नहीं आती है? रिफ्लेक्टर लगाने वाली कंपनी के पेपरों में कहीं नहीं लिखा है कि इसको उत्तराखंड सरकार करवा रही है। इन सब बातों को देखते हुए लगता है कि कहीं न कहीं अल्मोड़ा पुलिस ही इस मुहिम को चला रही है। फिर ख़ाकी में लगातार क्यों दाग लग रहे हैं?
आखिर खबर के बाद मीडिया कर्मियों को छूट क्यों?
क्राइम स्टोरी की पहली खबर के बाद क्यों अल्मोड़ा के कप्तान ने इस स्टिकर के लिए मीडिया और सरकारी कर्मचारियों को छूट दी? सवाल ये खड़ा होता है कि जब कप्तान के आदेशों से ये काम नहीं हो रहा था तो फिर उन्होंने ये छूट क्यों दी?

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