आन्दोलन की यादें बचाने को आत्मदाह को ‘बेबस’ अध्यापक

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प्रमाणिक धरोहर बचाने पर सरकार खामोश!
चंद्र प्रकाश बुडाकोटी प्रकाश
देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य को पाने के लिए युवाओं ने जहां हमेशा के लिए मौत की चादर ओढ़ ली वहीं आन्दोलन की राह पर चलने वाले आन्दोलनकारियों को पुलिस की लाठियों व गोलियों का शिकार होना पड़ा लेकिन उनके कदम नहीं डगमगाये और उनकी इच्छाशक्ति के चलते राज्य मिल पाया। कितना बडा मजाक है कि जिन आन्दोलनकारियों की बदौलत उत्तराखण्ड मिला उनकी धरोहर बचाने के लिए भी एक अध्यापक को राज्य की हर सरकार के सामने अपनी पीढा रखनी पडी लेकिन किसी भी सरकार ने आन्दोलनकारियों की यादों को संजोने के लिए एक संग्राहालय के लिए जगह तक देना उचित नहीं समझा और अब त्रिवेन्द्र सरकार के सामने आन्दोलनकारियों की यादों को बचाने के लिए एक अध्यापक ने गुहार लगाई है तथा साफ अल्टीमेटम दिया है कि ऐसा न होने पर वह मजबूर होकर आत्मदाह जैसा कदम उठा सकते हैं।
बिडम्बना देखिये राज्य निर्माण आंदोलन के दस्तावेजो के सरंक्षण के लिए भी आत्मदाह जैसा कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है।लेकिन जिस आंदोलनों, शहादतों के बाद राज्य प्राप्त हुआ उस से जुडी निशानिया अनमोल धरोहर को संजोने सुरक्षित रखने में सरकार रूचि ही नहीं ले रही है।
पेसे से शिक्षक अमर शहीद दस्तावेज धरोहर सुरक्षा समिति के संस्थापक अध्यक्ष बीएल सकलानी सालो से उनके पास रखे राज्य निर्माण आंदोलनों के संकलित दस्तावेजो को सरंक्षण के लिए दर्जनों बार सीएम से लेकर मंत्री बिधायक तक गुहार लगा चुके है लेकिन उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है।जिस राज्य आंदोलन की बदौलत राज्य में आज 9 मुख्यमंत्री सैकड़ो बिधायक दर्जनों मंत्री बड़े बड़े ओहोदो से नवाजे गए अफसर बिराजमान है उस आंदोलन से जुडी निशानियाँ ऐतिहासिक घटनाओ के दस्तावेजो को कितना संकलित किया जा रहा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की आंदोलनकारी पृष्ठ भूमि से जुड़े अध्यापक बीड़ी सकलानी के पास उन्नीस सौ चोरांनव्वे से लेकर आज तक के राज्य निर्माण आंदोलन से जुडी कई महत्वपूर्ण दस्तावेजो का एक निजी संग्रहालय है जो की आज छतिग्रस्त हो चुका है।जिसके संरक्षण के लिए बीड़ी सकलानी लगातार सरकारो से मांग करते रहे है।लेकिन किसी ने उनकी इस पुकार को सुनने की जहमत नहीं उठाई।आज हालात यह है कि देहरादून के राजपुर रोड शहंशाही आश्रम के जिस कमरे में इन अनमोल निशानियों को संजोकर रखा गया है वह कमरा छतिग्रस्त हो गया है यह प्रमाणिक धरोहर नष्ठ होने के कगार पर है जिसके संरक्षण के लिए अब थक हार कर बीड़ी सकलानी आत्मदाह जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर है। पांच जुलाई के पत्र जिसको की डीएम के मार्फत मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया है उसमे उन्होंने इस पीड़ा को उजागर किया है।

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