फोन पर चल रही सरकार!

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‘समान्तर सरकार’ चला रहा भाजपा नेता
अफसरशाही में नेता को लेकर बेचैनी
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में त्रिवेन्द्र सरकार सौ दिन के बाद भी आवाम के बीच अपनी विकास पुरूष की छवि नहीं बना पाई है और आवाम के मन में निराशा का माहौल है तथा उसे यह समझ नहीं आ रहा कि प्रचंड बहुमत वाली सरकार की दशा और दिशा क्या है? सरकार ने उत्तराखण्ड पर चढे कर्ज के बोझ को कम करने के लिए फिजूलखर्ची पर नकेल लगाने का दम भरा था लेकिन सरकार के दो मंत्री जिस तरह से मात्र सौ दिन में ही पेरिस यात्रा पर उड़ गये और सरकार के मुखिया ने जिस तरह से मीडिया की टीम अपने साथ जोडी है वह साफ इशारा कर रही है कि सरकार में इच्छाशक्ति की कमी है? हैरानी वाली बात है कि भाजपा का एक बडा नेता भी इन दिनों फोन पर समान्तर सरकार चला रहा है और शासन व जिलों के कुछ अफसरों को वह फोन पर काम करने का सीधे हुक्म जारी कर रहा है जिससे दर्जनों अफसरों में बेचैनी का माहौल है और अगर इस तरह से समान्तर सरकार चलती रही वह त्रिवेन्द्र सरकार के लिए आने वाले समय में बडी घातक हो सकती है?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में जब भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला तो भाजपा हाईकमान ने त्रिवेन्द्र रावत को मुख्यमंत्री की कमान सौंप दी थी जिससे मुख्यमंत्री की कतार में खडे कुछ राजनेताओं के मन में एक बडी पीढ़ा हुई थी इसी के चलते उनके मन में समान्तर सरकार चलाने का जज्बा इन दिनों देखने को मिल रहा है। इनमें से एक राजनेता तो विधायक भी नहीं है लेकिन उसने राज्य के सचिवालय से लेकर कुछ जिलों के अफसरों को अपना भौकाल दिखाना शुरू कर रखा है और चर्चा है कि यह बडा राजनेता अफसरों को फोन पर हुक्म जारी कर रहा है कि क्या काम होना है और क्या काम नहीं होना। राजनेता के आदेश को अफसर माने या ना माने इसको लेकर उनके मन में एक बडी दुविधा पैदा हो रखी है और उन्हें इस बात का भी डर है कि जिस तरह से भाजपा के कुछ नेताओं का अक्सर कद बडा कर दिया जाता है तो उससे उनके सामने भविष्य में एक बडा खतरा मंडरा जाता है। शासन के एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भाजपा का नेता चंद विभागों में नियुक्तियों को लेकर भी खुली दखल कर रहा है और एक विभाग में एक नियुक्ति को लेकर तो यहां तक कह दिया कि किसे इस पोस्ट पर नियुक्त करना है। फोन से सरकार चला रहे नेता का कद बडा होने के कारण शासन व चंद जिलों के अफसरों में बेचैनी का माहौल है और वह यह तय ही नहीं कर पा रहे कि आखिरकार वह सरकार के आदेश पर काम करें या फिर इस राजनेता के कहने पर? चर्चा यह भी है कि भाजपा का यह नेता संघ के कुछ बडे नेताओं का काफी दुलारा है और इसी के चलते वह समान्तर सरकार चलाने के लिए अब तेजी के साथ आगे आ रखा है जिससे आने वाले समय में त्रिवेन्द्र सरकार के लिए यह खतरे की एक बडी घंटी साबित हो सकता है? अफसर इस पूरे मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए है और वह सरकार के सामने उस नेता का नाम भी उजागर नहीं करना चाहते जो फोन पर सरकार चला रहा है? अफसरों को इस बात का हमेशा खतरा दिखता है कि अगर उन्होंने किसी भी राजनेता के साथ आमने-सामने का विवाद खडा किया तो कहीं उनकी कुर्सी पर भी खतरा न मंडरा जाये इसलिए फोन पर सरकार चला रहे नेता को लेकर अधिकांश अफसरों ने चुुप्पी साध रखी है और आने वाला समय ही बतायेगा कि इस राजनेता का दबदबा अफसरशाही मानेंगे या फिर वह राजनेता के हुक्म का पालन करने से अपने आपको पीछे रखेंगे?

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