नहीं चला जाता इतनी दूर…

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देहरादून। उत्तराखण्ड में त्रिवेन्द्र सरकार राज्य के गांव को स्मार्ट बनाने का ऐलान कर चुकी है लेकिन उसके इन दावों की पोल मुख्यमंत्री आवास से मात्र 19 किलोमीटर दूरी पर स्थित छोटी भितरली गांव खोलता हुआ नजर आ रहा है। मासूम बच्चे शिक्षा लेने के लिए घर से स्कूल तक का खतरनाक चार किलोमीटर का सफर सुबह-शाम तय कर रहे हैं और उनके मन में इस बात को लेकर बडी पीढा है कि आखिरकार कब इस गांव में सड़क बनेगी और उनके माता-पिता उन्हें गाडी में लेकर स्कूल तक पहुंचेंगे। बच्चों का दर्द यह कहते हुए सुना गया कि इतनी दूर नहीं चला जाता…..।
हैरानी वाली बात है कि राज्य को विदेशों की तर्ज पर विकसित करने का दम प्रदेश की सरकारें भरती आ रही हैं। सरकार दावा कर रही है कि 2018 तक प्रदेश के सभी गांव में बिजली पहुंच जायेगी लेकिन सरकार ने कभी इस ओर शायद गौर ही नहीं किया कि राज्य के कितने गांव ऐसे हैं जहां आज तक सड़क ही नहीं पहुंच पाई है। पहाडों में सड़कें नहीं बन पाई इसका तो सबको इल्म है लेकिन राजधानी का ही एक गांव ऐसा है जहां आज तक सरकारें सड़क पहुंचाने में भी सफल नहीं हो पाई। सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार ए.सी. कमरों में बैठकर गावं को स्मार्ट बनाने का दम भर रही है जिसे यह भी नहीं पता कि मात्र 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक गांव के छोटे स्कूली बच्चे रोज स्कूल का सफर आठ किलोमीटर पैदल तय करते हैं और वह यह भी कहते हुए दिखते हैं कि यह सफर मौत का सफर है और इतनी दूर रोज नहीं चला जाता।

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