निर्जला एकादशी पर हजारों श्रद्वालूओ ने लगाई आस्था की डुबकी

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ऋषिकेश अमित सूरी-गंगा दशहरा पर्व के बाद आज धर्म नगरी मे निर्जला एकादशी पर्व की धूम रही।पर्व पर हजारों श्रद्वालूओ ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
सोमवार को निर्जला एकादशी पर हजारों श्रद्वालुओ ने भगवान विष्णु की अराधना कर गंगा मे स्नान कर पौराणिक मान्यताओं अनुसार अपने पितृरो की शांति के लिए सुराई एवं पंखे दान किए।आस्था की डुबकी लगाने के लिए देश के विभिन्न प्रातों से श्रद्वालूओ के उमड़े सैलाब के चलते आज लगातार दूसरे दिन नगर के सभी प्रमुख मार्गो पर होच पोच की स्थिती बनी रही और लोगों को दिनभर तगड़ा जाम झेलना पड़ा।इन सबके बीच आज तड़के से ही भारी तादात मे स्नानार्थियो ने गंगा तटो की और रुख करना शुरु कर दिया था।सुबह दस बजे के बाद अचानक से श्रद्वालूओ की जबरदस्त भीड़ उमड़ने से स्नान मे काफी तेजी महसूस की गई।पर्व पर गंगा सभा द्वारा विशेष आरती का आयोजन कर जहाँ श्रद्वालूओ को प्रसाद वितरित किया गया वहीं त्रिवेणी घाट पर आज विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया गया था जिसमे बड़ी संख्या मे श्रद्वालूओ ने सम्मिलित होकर आहुति दी।उल्लेखनीय है कि सनातन धर्म मे निर्जला एकादशी का बहुत महत्व बताया गया है।मान्यता है कि इस एक एकादशी के व्रत से व्यक्ति को पूरे साल की 23 एकादशियों के पुण्य जितने फल की प्राप्ति होती है।पौराणिक मान्यताओं अनुसार हिंदू धर्म में एकादशी व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से तमाम कष्टो से मुक्ति मिलती है।गौरतलब है कि एक साल में 24 एकादशी होती हैं, लेकिन जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते है ।इस व्रत मे पानी का पीना वर्जित माना गया है, इसिलिये इस निर्जला एकादशी भी कहते हैं।

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