त्रिवेन्द्र-सतपाल में टेंशन!

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देहरादून। उत्तराखण्ड में भाजपा की प्रचंड बहुमत वाली सरकार आने के बाद मुख्यमंत्री की दौड में सबसे आगे सतपाल महाराज व त्रिवेन्द्र रावत रहे लेकिन इस जंग में सतपाल महाराज त्रिवेन्द्र के भाजपा हाईकमान से नजदीकी के चलते उनके हाथ में राज्य की कमान आ गई और सरकार के मुखिया ने सभी मंत्रियों की जुबान पर नकेल लगाने के लिए मदन कौशिक को सरकार का प्रवक्ता नियुक्त कर यह संदेश दे दिया था कि सरकार के हर फैसले पर सिर्फ मदन कौशिक ही आवाम से रूबरू होंगे। हरीश रावत कार्यकाल में भोले महाराज व हरीश रावत के बीच नजदीकियों से हमेशा सतपाल महाराज नाराज दिखाई देते थे और जैसे ही राज्य में भाजपा की सरकार आई और सीएम की कमान त्रिवेन्द्र रावत के हाथों मंे आई तो एक बार फिर भोले महाराज व सरकार के मुखिया के बीच अचानक करीबी देखने को मिली तो उससे सतपाल महाराज कहीं न कहीं नाराज नजर आ रहे हैं? हैरानी वाली बात है कि सतपाल महाराज के पर्यटन मंत्री होने के बावजूद बद्रीनाथ में आई आपदा के बाद बचाव की जिम्मेदारी त्रिवेन्द्र रावत ने सतपाल महाराज को न देकर जिस तरह से मदन कौशिक को सौंपी थी उससे साफ नजर आ रहा है कि त्रिवेन्द्र रावत व सतपाल महाराज में पर्दे के पीछे से काफी टेंशन चल रही है और अगर यह टेंशन इसी तरह से आगे बढती रही तो विकास की उच्चाईयों पर राज्य को ले जाने के बडे-बडे दावे करने वाली सरकार आपसी गुटबाजी में ही युद्ध करती हुई नजर आयेगी?
उल्लेखनीय है कि सतपाल महाराज के भाई भोले महाराज व त्रिवेन्द्र रावत के बीच पुराना कोई रिश्ता व मिलन देखने व सुनने को नहीं मिला था लेकिन जैसे ही उत्तराखण्ड सरकार की कमान त्रिवेन्द्र रावत के हाथों में आई तो उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की दौड में आगे बढने वाले सतपाल महाराज के भाई भोले महाराज से तेजी के साथ अपनी नजदीकियां बढानी शुरू कर दी और कुछ समय के कार्यकाल में ही भोले महाराज व त्रिवेन्द्र के बीच ऐसा मिलन देखने को मिलने लगा जैसे दोनो का वर्षों से मिलन होता आ रहा हो? भोले महाराज व त्रिवेन्द्र रावत के बीच बढती नजदीकियां सतपाल महाराज को काफी बेचैन किये हुए है और वह इस बात को लेकर भी कहीं न कहीं त्रिवेन्द्र रावत से खफा होंगे कि आखिरकार वह किस मिशन के तहत भोले महाराज के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहे हैं? सतपाल महाराज को सरकार ने पर्यटन मंत्री का जिम्मा सौंपा गया लेकिन जिस तरह से सरकार के चंद वीआईपी कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री ने सतपाल महाराज को उससे दूर रखा उससे साफ झलक गया था कि दोनो राजनेताओं के बीच कहीं न कहीं एक बडी टेंशन चल रही है? अगर त्रिवेन्द्र रावत और सतपाल महाराज के बीच सबकुछ ठीक होता तो बद्रीनाथ में रेल सर्वेक्षण के उद्घाटन में मुख्यमंत्री पर्यटन मंत्री को भी जरूर आमंत्रित करते क्योंकि सतपाल महाराज का ही ख्वाब था कि पहाड़ में रेल को चढ़ाया जाये। सतपाल महाराज की सरकार के वीआईपी कार्यक्रमों में दूरियां भी अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं त्रिवेन्द्र रावत द्वारा अपने सभी मंत्रियों को मीडिया से दूर रखने के लिए उन्होंने जिस तरह से मदन कौशिक को सरकार का प्रवक्ता नियुक्त किया है उससे कहीं न कहीं सरकार के कुछ मंत्रियों में इस बात को लेकर नाराजगी बन रही होगी कि आखिरकार मीडिया के सामने उन्हें बोलने का अधिकार क्यों छीना गया है? मदन कौशिक सरकार के हर फैसले को मीडिया के सामने रख रहे हैं वहीं बद्रीनाथ में भी आई आपदा में सिर्फ मदन कौशिक ही आगे खडे दिखाई दिये ऐसे में सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या सरकार के अन्दर सबकुछ ठीक चल रहा है या फिर ऐसी कोई राजनीतिक खिचडी पक रही है जिससे त्रिवेन्द्र रावत के सामने एक बडा संकट लाकर खडा किया जा सके?

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