त्रिवेन्द्र की गैरहाजरी में मदन सीएम?

0
140

देहरादून/ऋषिकेश। उत्तराखण्ड सरकार में मुख्यमंत्री के बाद क्या मदन कौशिक सबसे पॉवरफुल मंत्री हैं? इसको लेकर अब राज्य में एक नई बहस छिड गई है क्योंकि जब बद्रीनाथ के विष्णुप्रयाग के पास हाथी पहाड़ में लैंडस्लाइड हुई तो मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में मदन कौशिक ने जिस तरह से यात्रियों को सकुशल बचाने की कमान अपने हाथों में ली और शासन से लेकर जिला प्रशासन को जाम में फंसे यात्रियों के लिए मार्ग को साफ कराने का हुक्म दिया तो उससे सवाल खडे हो गये कि क्या मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में मदन कौशिक उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य की कमान अपने हाथों में लिये हुए हैं? अगर ऐसा न होता तो लैंडस्लाइड के बाद प्रदेश के अधिकांश मंत्री जरूर यात्रियों की चिंता को लेकर एकसाथ शासन व प्रशासन को हुक्म देते हुए नजर आते लेकिन लैंडस्लाइड के मामले में सिर्फ मदन कौशिक का आगे आना भाजपा के अन्दर एक नया तूफान खडा कर रहा है?
उत्तराखण्ड में शुरू हुई चारधाम यात्रा से पहले सरकार व शासन तैयारियांें को लेकर बडे-बडे दावे करती है और चारधाम के शुरूआत में ही जिस तरह से विष्णुप्रयाग के पास हाथी पहाड़ में लैंडस्लाइड होने से वहां हजारों यात्री फसें उससे उनके सामने खाने-पीने का एक बडा संकट खडा हुआ और जिला प्रशासन की तैयारियों के बडे-बडे दावे फुस हो गये। सवाल उठ रहे हैं कि जब चारधाम यात्रा से पहले लैंडस्लाइड वाले इलाको को चिन्हित किया गया था तो वहां सभी प्रकार की तैयारियों के लिए टीम को क्यों तैनात नहीं रखा गया था?
गौरतलब है कि उत्तराखंड के चमोली जिले में लगातार बारिश की वजह से कल विष्णुप्रयाग के पास हाथीपहाड़ में लैंडस्लाइड हो गया जिससे बद्रीनाथ हाईवे बंद हो गया था। एडमिनिस्ट्रेशन टूरिस्ट्स को रेस्क्यू करने की कोशिश में जुट गया था। लैंडस्लाइड होने के कारण हजारों यात्री जिनमें महिलायें और बच्चे भी शामिल हैं वह वहां फंस गये और वहां उनके सामने खाने-पीने के समान का भी आकाल पड़ गया। हालांकि प्रशासन ने यात्रियों को बिस्कुट व पानी की बोतलें उपलब्ध कराने के लिए अपने कदम आगे बढाये तथा सरकार ने आपातकालीन नम्बर भी जारी किये जिससेे कि यात्रियों के बारे में उनके परिजनों को जानकारी मिल सके।
बताया जा रहा है कि सबसे ज्यादा परेशानी बद्रीनाथ और जोशीमठ के इलाके में हुई है जो राजधानी देहरादून से करीब 300 किलोमीटर दूर है। बता दें कि 2013 में बाढ़ और बारिश की वजह से हजारों लोगों की मौत हो गई थी। जिनमंे से ज्यादातर श्रद्धालू थे। जिला प्रशासन का दावा है कि गुरुद्वारे में ठहरने एवं खाने के तमाम इंतजाम किए गए और यात्रियों को कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग, चमोली, पीपलकोटी, जोशीमठ में रोका गया। सवाल उठ रहे हैं कि जब चारधाम यात्रियों की तैयारियां पूर्व में पूरी कर ली गई थी और यह चिन्हित कर लिया गया था कि किस-किस इलाके में लैंडस्लाइड हो सकती है तो वहां इससे निपटने के लिए सभी टीमों को आखिर क्यों तैनात नहीं किया गया था? सवाल खडे हो रहे हैं कि एक ओर तो बद्रीनाथ में लैंडस्लाइड में हजारों यात्री फसे गये और प्रदेश के मुखिया राज्य से दूर हैं तो उनकी अनुपस्थिति में आखिरकार सरकार के कामकाज की जिम्मेदारी किसके हाथों में सौंपी गई? बद्रीनाथ में लैंडस्लाइड के मामले में जिस तरह से सरकार के प्रवक्ता मदन कौशिक आगे आये और दावा किया कि शाम तक मार्ग खोल दिया जायेगा और पैदल मार्ग खोल दिया गया है तो सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार के मुखिया अपनी अनुपस्थिति में प्रदेश की बागडोर मदन कौशिक के हाथों में सौंप कर गये हैं?

LEAVE A REPLY