जल ही जीवन है के साथ शहर मे शुरु हुई प्याऊ सेवा

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ऋषिकेश-मौसम के गर्म तेवरो के बीच तीर्थ नगरी मे पेयजल कटोति आम आदमी के साथ तीर्थाटन पर आये श्रद्वालूओ के लिए कोढ मे खाज की कहावत को चरितार्थ कर रही है।राहगीरों के सूखते हलक को देख शहर के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानो के बाहर प्याऊ लगाने शुरू कर दिए हैं।उनकी इस कोशिशो को जहाँ यात्री एवं स्थानीय लोगों द्वारा खुलकर सराहा जा रहा है ,वहीं प्रशासन के लिए भी यह छोटी मगर सार्थक पहल आईना दिखाने का काम कर रही है।
विश्व प्रसिद्व चारधाम यात्रा के उफान पर चलने के बावजूद प्रदेश सरकार यात्रा के मुख्य द्वार ऋषिकेश मे मौलिक सुविधाए तक तीर्थ पर आये लोगों को पूरी तरह से मयस्सर नही करवा पा रही है।विधुत कटौति के साथ नगर मे पिछले एक माह से पेयजल संकट गहरा रखा है।पेयजल किल्लत से नगरावासियो सहित देश के विभिन्न राज्यो से यात्रा के लिए आये श्रद्वालू भी हलकान हो रखे हैं।विभिन्न क्षेत्रों मे जल संस्थान द्वारा नलो को तो लगाया गया है ,लेकिन पेयजल कटौति की वजह से दिनभर यह नल सूखे ही नजर आते हैं।यात्रा बस अड्डे एवं रेलवे स्टेशन सहित शहर के तमाम महत्वपूर्ण क्षेत्रों मे भी कुछ यही तस्वीर देखने को मिल रही है।शहर मे पेयजल संकट को देखते हुए यहाँ के व्यापारियों ने लोगों की प्यास बुझाने के लिए सकारात्मक पहल करते हुए प्याऊ लगाने शुरू कर दिए हैं।रेलवे रोड़ पर युवा व्यापारी विनीत जैन द्वारा इस और की गई शुरूवात अन्य व्यापारियों के लिए भी कुछ इस तरह प्रेरणा बनी की शहर मे अनेको स्थानो पर व्यापारियो एवं सामाजिक संस्थाओ ने प्याऊ लगाने शुरू कर दिए।उल्लेखनीय है कि करीब एक दशक पूर्व तक गर्मी के मौसम के आगाज के बाद शहर की कुछ चुनिंदा संस्थाओ द्वारा विभिन्न स्थानो पर शीतल जल के प्याऊ लगाये जाते थे।लेकिन धीरे धीरे यह परम्पराएं गौण होने लगी ,पिछले कुछ वर्षो से तो यात्राकाल के दौरान भी शीतल जल के प्याऊ दिखने बंद हो गये थे।इन सबके बीच अच्छी खबर बस यही है कि आसमान से बरसती आग के बीच पेयजल के लिए मचे त्राही माम को देख सामाजिक एवं व्यापारिक संस्थाओ से जुड़े लोगों की दम तोड़ती मानवीय संवेदनाएं एक बार फिर से पुर्नःजीवित होनी शुरू हो गई है।

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