पुलिस मुख्यालय कागजी शेर!

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देहरादून। उत्तराखण्ड का लम्बा चौड़ा पुलिस मुख्यालय लम्बे समय से कागजी शेर दिखाई दे रहा है। हैरानी वाली बात तो यह है कि पुलिस मुख्यालय के चंद अफसर सभी जिलों में मुख्यालय के आदेशों का पालन करने के लिए पत्र लिखते हैं और जनपद के पुलिस कप्तानों को संदेश देते हैं कि छोटे पुलिस अफसरों के अधिकार और कर्तव्य क्या हैं? मुख्यालय ने सभी जनपदों के पुलिस कप्तानांे को आदेश दे रखे हैं कि पुलिसकर्मियों व चौकी प्रभारियों के तबादले एसपी सिटी व एसपी देहात करेंगे लेकिन कुछ जनपदों में मुख्यालय के यह आदेश तार-तार हो रहे हैं और जनपदों में आदेश करके खामोश हो जाने वाला पुलिस मुख्यालय इस बात की समीक्षा करने के लिए भी आगे नहीं आता कि पुलिस मुखिया के आदेशों का जनपद में पालन हो रहा है कि नहीं? हैरानी उस समय हो गई जब राजधानी में सिपाही से लेकर चौकी प्रभारियों के तबादले खुद पुलिस कप्तान ने कर दिये और जिन दरोगाओं को थानेदारों की कमान सौंपी गई उनमें से चंद उसके काबिल हैं इसको लेकर भी पुलिस महकमें के अन्दर एक बहस छिडी हुई है। पुलिस मुख्यालय के आदेशांे की तो उस समय धज्जियां उड़ गई जब जनपद के दो थानों में इंस्पेक्टरों को तैनाती दे दी गई। गजब बात तो यह है कि हरीश रावत राज में एक पुलिस कप्तान को वीडियो कांफ्रेंसिंग में हमेशा आडे हाथों लेने वाले डीजीपी जनपद में मुख्यालय की उड़ रही धज्जियों पर क्यों खामोश हैं यह उनकी कार्यशैली पर सवाल खडे कर रहा है?
उल्लेखनीय है कि पुलिस मुखिया एमए गणपति ने विभाग में सुधार लाने के बडे-बडे दावे किये थे और ऐलान किया था कि जो भी भ्रष्टाचार व कामचोरी करेगा उस पर कार्यवाही की जायेगी। पुलिस मुख्यालय ने जनपदों में तैनात एसपी सिटी व एसपी देहात को पुलिसकर्मियों से लेकर चौकी प्रभारियों तक के तबादले करने का आधिकार दिया गया लेकिन चंद जनपदों में पुलिस कप्तान मुख्यालय के इन आदेशों को हवा में उड़ाते आ रहे हैं। चंद दिन पूर्व ही एक एसपी सिटी ने एक पुलिसकर्मी का तबादला किया तो पुलिस कप्तान ने एसपी सिटी को नोटिस देकर उनका स्पष्टीकरण मांग लिया कि उन्होंने कैसे पुलिसकर्मी का तबादला किया? जनपद में चंद दिन पूर्व पुलिसकर्मियों से लेकर बडी संख्या में दरोगाओं के तबादले कर दिये गये इन तबादलों से पुलिस महकमें में बडी नाराजगी देखने को मिल रही है और सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार चौकी प्रभारी व थाना प्रभारी बनाने के लिए किस पैमाने के तहत लिस्ट जारी की गई? पुलिस के जो दरोगा सात-आठ साल से थाने व चौकियों में तैनात होकर बड़ा काम करने में आगे दिखाई देते थे उनमंे इस बात को लेकर बडी नाराजगी है कि कुछ चौकी प्रभारियों व थाना प्रभारियों की पोस्टिंग में जिस तरह से रहस्यमय खेल खेला गया वह समझ से परे है? अपराधियों की नाक में नकेल डालने वाले आधा दर्जन दरोगाओं को जिस तरह से हाशिये पर लाकर खडा कर दिया गया उससे पुलिस महकमें में एक बडी हलचल देखने को मिल रही है और सात-आठ साल से दरोगा बनकर काम करने वालों में इस बात को लेकर बडा गुस्सा है कि जब उनका थानेदार बनने का समय आया तो नेहरू कालोनी व रायपुर थाने में थाना प्रभारी नियुक्त करने के बजाए वहां इंस्पेक्टरों को तैनात कर दिया गया। ऐसे में सवाल खडा होता है कि क्या पुलिस मुख्यालय सिर्फ कागजी शेर बनकर ही जनपदों में अपने आदेशों का मजाक उड़ते हुए देखता रहेगा?

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