खतरनाक है माओवाद की ‘दस्तक’

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देहरादून। उत्तराखण्ड में पिछले 16 सालों से माऊवाद की काली छाया से प्रदेश कांपता रहा है माऊवाद पर नकेल लगाने के लिए सरकारों ने बडे-बडे दम भरे लेकिन आज तक कोई भी सरकार मा1द्मह्यवाद पर नकेल लगाने में सफल नहीं हो पाई। माऊवाद पर शिंकजा कसने के लिए एसटीएफ व क्वीक एक्शन फोर्स का गठन किया गया था लेकिन आज तक किसी भी युनिट ने माऊवादियों के नेटवर्क को भेदने के लिए कोई बडी योजना के तहत काम नहीं किया। माऊवाद के नेटवर्क को भेदने मे ंजहां पुलिस को एसटीएफ जहां हमेशा नाकाम रही वहीं खुफिया एजेंसियां भी इनके नेटवर्क को तोडने में सफल नहीं हो पाई। माऊवादियों के हौसले इतने बुलंद है कि वह पहाडी क्षेत्रों में जहां चाहे सरकार के खिलाफ अपनी आग उगल रहे हैं लेकिन सरकारी तंत्र इनके नेटवर्क के आगे हमेशा बौना साबित होता रहा है। अब तो यह शंका भी खडी हो रही है कि जिस तेजी के साथ राज्य में माओवादी सरकार को खुला एल्टीमेटम दे रहे हैं उससे राज्य के अन्दर माओवाद की दस्तक घातक होती दिखाई दे रही है?
उल्लेखनीय है कि राज्य बनने के बाद माओवाद पर नकेल लगाने के लिए सरकार व पुलिस महकमें ने बडे-बडे दावे किये थे लेकिन सरकार के यह दावे हमेशा हवा-हवाई होते ही देखने को मिले। माऊवादियों का नेटवर्क कितना घातक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह पहाडी जनपदों में खुलेआम आकर सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो कभी वह दीवारों पर सरकार के खिलाफ संदेश लिखकर पोस्टर तक बांटने में सफल हो गये। हमेशा खुफिया तंत्र व पुलिस महकमा माओवादियों के नेटवर्क के आगे फिसड्डी दिखाई दिया है और हमेशा माओवादियों के अल्टीमेटम के बाद पुलिस प्रशासन उन पर नकेल लगाने का दम भरता रहा है। अब तक हुई माओवादियों की किसी भी घटना के बाद पुलिस व खुफिया तंत्र यह पता लगाने में सफल नहीं हो पाया कि आखिरकार माओवादियेां का गुट कहां से आकर कहां गायब हो जाता है। उत्तराखण्ड का 65 प्रतिशत इलाका वन क्षेत्र में है और इन वन क्षेत्रों में कौन-कौन देशद्रोही वहां डेरा डालकर रखते हैं इसका कभी खुफिया तंत्र या पुलिस को पता नहीं चल पाया? उत्तराखण्ड के वन क्षेत्र का इलाका आतंकवादियों व माओवादियों के लिए सुरक्षित जोन माना जाता है और जंगलों में ना तो कभी पुलिस का नेटवर्क काम करता हुआ दिखाई दिया और ना ही खुफिया तंत्र का। ऐसे में उत्तराखण्ड के अन्दर माओवादियों की दस्तक प्रदेश के लिए बडी घातक हो सकती है अगर समय रहते सरकार ने माओवादियों पर नकेल लगाने के लिए कोई बडा खाका तैयार न किया तो प्रदेश को कभी भी इसके घातक परिणाम देखने को मिल सकते हैं?

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