योगी के फैसलों की ‘नकल’

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देहरादून। उत्तराखण्ड व उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्रियों की ताजपोशी में मात्र 24 घंटे का अंतर ही देखने को मिला। 24 घंटे बाद सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री ने बूचड़खानों से लेकर माफियाओं तक पर नकेल लगाने के लिए ताबड़तोड़ फैसले कर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री योगी ने महापुरूषों के जन्मदिन पर होने वाली छुट्टियों को निरस्त कर जिस तरह से कड़ फैसले लेने का संदेश दिया उससे उत्तराखण्ड में योगी योगी गूंजने लगा और उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री से उनकी तुलना को लेकर जो शोर मचना शुरू हुआ उससे सरकार के मुखिया को भी यह कहने के लिए आगे आना पड़ गया कि उत्तर प्रदेश मंे गाड़ी 120 की स्पीड से चलती है तो उत्तराखण्ड के पहाड़ों में गाड़ी की स्पीड 20 होती है। योगी के फैसलों की सरकार तो नकल कर ही रही थी लेकिन इस नकल में प्रदेश के राज्य मंत्री भी पीछे नहीं रहे और उन्होंने विश्वविद्यालयों मंे महापुरूषों के जन्मदिन पर छुट्टियां निरस्त करने का जिस तरह से आदेश दिया है, उससे सवाल खड़े हो रहे है कि आखिरकार मंत्री की यह घोषणा योगी सरकार के फैसले की तर्ज पर उठाया गया कदम है तो क्या सरकार मंत्री के इस फैसले का कैबिनेट मंे हरी झंडी देगी?
चर्चाओं से सराबोर हो रहे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ हर जगह छाये हुए है और अब तो उत्तराखण्ड में त्रिवेन्द्र सरकार के किस्से नहीं बल्कि योगी सरकार द्वारा लिए जा रहे सख्त फैसलों की गूंज पहाड़ से लेकर मैदान तक में गूंज रही है।
बतादें कि योगी सरकार ने निर्णय लिया था कि महापुरुषों की जंयंती के दिन छुट्टी के बजाय स्कूल कालेजों महापुरुष से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले की जद में तकरीबन 15 अवकाश आए हैं, बकायदा केबिनेट की बैठक ने फैसला लिया गया था। कार्य संस्कृति में सुधार के लिहाज से देखा जाए तो योगी सरकार का यह फैसला सराहनीय रहा। चंद दिन पूर्व प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने ऐलान कर दिया कि अब से विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में महापुरुषों की जयंती के दिन छुट्टी नहीं होगी, बल्कि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंत्री की घोषणा के बाद यही माना जा रहा है कि उन्होंने योगी सरकार के फैसले की तर्ज पर यह कदम उठाया है। निसंदेह यह एक अच्छा कदम है। मगर इसने राज्य सरकार की कार्यसंस्कृति को सवालों के घेरे में भी ला दिया है। सवाल यह है कि उत्तराखंड में महापुरुषों की जंयंती पर छुट्टी निरस्त करने का निर्णय क्या केवल उच्छ शिक्षण संस्थानों पर ही लागू होगा? क्या यह निर्णय विद्यालयी शिक्षा में लागू नहीं होगा? यदि होगा तो क्या इसके लिए विद्यालयी शिक्षा मंत्री अलग से घोषणा करेंगे? इसी तरह सवाल यह भी है कि क्या यह निर्णय बाकी महकमों पर लागू नहीं होगा? और यदि होगा तो क्या उन महकमों के मंत्री इस बाबत अलग-अलग घोषणा करेंगे? क्या यह फैसला राज्य कैबिनेट की बैठक में नहीं लिया जाना चाहिए था?
उल्लेखनीय है कि योगी सरकार ने महापुरूषों की जयंती पर होने वाली छुट्टियों को निरस्त करने के आदेश जारी करने से पहले उसे कैबिनेट बैठक में हरी झंडी दी थी और उसके बाद ही इस फैसले का अमल में लाने का दम भरा गया लेकिन उत्तराखण्ड के राज्यमंत्री ने सिर्फ भावनाओं में आकर यह फरमान जारी कर दिया और कैबिनेट व मुख्यमंत्री को विश्वास में लिया गया ऐसा भी संभवतः नजर नहीं आ रहा है? सवाल उठ रहे है कि आखिरकार त्रिवेन्द्र सरकार कब योगी सरकार के फैसलों की नकल करने से अपने आपको दूर रखकर दमदार फैसले लेने के लिए आगे आएगी?

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