उत्तराखण्ड में फिर शुरू होगा खनन का काला कारोबार!

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देहारादून। उत्तराखण्ड में जिस खनन को लेकर भाजपा आये दिन सदन से लेकर सड़क तक शोर मचाती रहती थी उस खनन को लेकर जिस तेजी के साथ उसके मन में प्रेम उमड़ रखा है वह सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगा रहा है? खनन खुलने से खनन कारोबारियों की तो बल्ले-बल्ले हो रही है लेकिन आम आदमी का मकान बनाने का सपना धडाम होता जा रहा है। राज्य के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि हरीश रावत सरकार में खनन का बडा कारोबार करने वाला कारोबारी भाजपा सरकार में मौजूद एक बडे सफेदपोश का हमराज है और चुनाव लड़ाने के लिए इस हमराज ने सफेदपोश को करोडो रूपये भेट में यह कहकर दिये थे कि अगर उत्तराखण्ड में भाजपा की सरकार आई तो खनन का सारा कारोबार उसे दे दिया जाये? चर्चाएं हैं कि इस कारोबारी ने राज्य में बनने वाली खनन नीति में भी अपनी दखल देनी शुरू कर दी है और आशंका उठ रही है कि कारोबारी के हिसाब से ही राज्य में खनन नीति देखने को मिल सकती है? चर्चाएं हैं कि हरीश रावत राज में डोईवाला इलाके में ही यह कारोबारी एक ही रात में अवैध खनन का इतना बडा काला कारोबार कराता था जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता? सवाल उठ रहा है कि राजधानी में एक रवन्ने से सैकडो गाडियों में खनन करने का खेल पुलिस के सामने आ चुका है और तो और फर्जी रवन्नों से खनन का काला कारोबार राजधानी में किसकी शह पर होता था इसलिए लिए आज तक किसी भी बडे पुलिस अफसर ने जांच करने का साहस नहीं किया। राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि हरीश सरकार से प्रेम रखने वाला खनन का पुराना कारोबारी अब भाजपा सरकार के एक सफेदपोश का हमराज बनकर राज्य में खनन का अधिकांश कारोबार अपने हाथों में लेने के लिए गोटियां बिछाने के खेल में जुट चुका है?
उल्लेखनीय है कि हरीश रावत राज में खनन की आड़ में अवैध खनन का बडा काला कारोबार चंद सफेदपोशों व दो-तीन अफसरों की मिलीभगत से चलता था। राजधानी का एक खनन व्यापारी हरीश सरकार में मुख्यमंत्री की तरह काम करने वाले एक सफेदपोश के साथ मिलकर राजधानी में अवैध खनन का बडा कारोबार करता था लेकिन बाद में सफेदपोश व खनन व्यापारी के बीच लेन-देन को लेकर विवाद हुआ था तो उनकी राहें जुदा हो गई थी। उत्तराखण्ड में विधानसभा चुनाव से पूर्व इस खनन व्यापारी ने सरकार में शामिल एक सफेदपोश को अपना हमराज बनाया और चर्चा है कि चुनाव के दौरान उन्हें काफी पैसा यह कहकर दिया था कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार आई तो खनन का काम वह करेगा और उसके अनुसार ही राज्य में खनन नीति बनेगी? चर्चाओं का बाजार गर्म है कि राज्य में बनने वाली खनन नीति मंे पर्दे के पीछे रहकर इस खनन कारोबारी ने अपनी गोटियां बैठानी शुरू कर दी हैं। चर्चा है कि राजधानी व कुछ अन्य बडे जिलों में खनन का सारा कारोबार पर्दे के पीछे रहकर यह खनन व्यापारी अपने हाथ में लेकर उसे छोटे-छोटे व्यापारियों को सौंप देगा? आशंका यहां तक उठ रही है कि खनन खोलने की आड़ में उत्तराखण्ड के अन्दर एक बार फिर अवैध खनन का काला कारोबार चंद बाहुबली खनन व्यापारियों के हाथों में आ सकता है?चर्चा यहां तक है कि अवैध खनन करने के समय भी फिक्स किया जा रहा है और रात्री दस बजे से सुबह पांच बजे तक चंद बाहुबली अवैध खनन का कारोबार करने के लिए आगे आने का खेल खेलने की तैयारी में जुट गये हैं? अगर सरकार की मंशा साफ है तो वह ऐलान कर दे कि अगर सरकार की नदियों किसी भी खनन माफिया ने अवैध खनन करने का दुसाहस किया तो उसके खिलाफ अपराधिक मुकदमें दर्ज किये जायेंगे और अवैध खनन करने वालों पर जुर्माना नहीं बल्कि उनके वाहन सीज कर उन पर कडी कानूनी कार्यवाही की जायेगी? हालांकि सरकार ऐसा कर पायेगी इसको लेकर अभी से ही शंका पैदा होने लगी है?

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