अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी संपत्तियों पर कब्ज़ा!

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अल्मोड़ा। सरस मार्केट चितई, जो महिलाओं के समूहों को फायदा देने के लिए सरकार ने खोला था। सरकार ने चित्तई मंदिर में आने वाले पर्यटकों को देखते हुए यह मार्केट को खोला गया था, पर सरकार की मंशा पर इस कदर पानी फेरा गया कि इस मार्केट में एक बारात घर, आँचल दुग्ध डेरी, चेली ऐपण, हीरा सिंह को एक दुकान का आवंटन किया गया है। आज तक दुकानों का किराया तक कहाँ है किसी को नहीं पता। यहाँ खुली दुकानों में एक ऐपण उद्योग केंद्र और दूसरा दुग्ध संघ चलाता है। और बारात घर एक आम व्यक्ति के द्वारा खोला गया है। जिनमें से कोई भी महिला समूह नहीं है। सरकार के द्वारा दिये जाने वाले फंड का बही कुछ नहीं पता। एक फंड जो तीन लाख का था उसी का पता लग पाया है कि वह आया था पर वह भी कहाँ खर्च हुआ है इसका भी कोई लिखा जोखा नही मिल पा रहा है। इसके बाद के कोई भी फंड का लेखा जोखा नही मिल पा रहा है। यही नही जो आता भी था वो कहाँ लग रहा है इसका भी नही पता। अधिकारियो ने जांच का सुनते ही कोई छुट्टी चला गया है तो कुछ ने रिलेरमेन्ट के कागज भी लगा दिए है महिलाओं के समूह को मिलने वाली दुकानें तक अन्य लोगों को दे दी गई है। यही नहीं जिला स्तरीय फेडरेशन एक महिला सशक्तिकरण के लिए स्वायत्तव् सहकारिता संस्था का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त एवं जागरूक करना इसका मुख्य उद्देश्य था पर यहाँ तो कोई भी महिला समूह को भी दुकानें नहीं दी गई है। 2००6 में ग्राम्य विकास के शासनादेश के आधार पर इसे बनाया गया था। इस सरस केन्द्र का पूर्ण जिम्मा हवालबाग विकास खंड के पास होने के बाद भी उन्हें कोई जानकारी नही हैं और ना ही इसके खातों या आय व्यय की भी कोई जानकारी नहीं दी गई।
आखिर आज तक का पैसा कहाँ गया और क्यों नहीं इस केंद को महिलाओं के समूह को दिया गया? यह एक बड़ा घोटाला सामने ला सकता है आखिर क़ौन अधिकारी और कर्मचारी है जो इस तरह का खेल खेल रहे है और क्यों? किसको इसका फायदा दिलाया जा रहा है? क्यों पूर्व समय से आज तक नव प्रभात स्वयत्व सहायता समूह नामक संस्था के पास है? जिसे कोई महिला न चला कर कोई पुरुष प्रधान चलता है। महिलाओं के समूह को रोजगार देने की बात करने पर जवाब मिलता है कि कोई नहीं आया, तो इस लिए वहाँ बारात घर खोल दिया पर हर साल बहुत अधिक मात्रा में बरातें होने पर भी केंद के पास कोई खाश पैसा नहीं है। जहाँ एक तरफ बाकि लोगो ने बरतो से काम कर बड़ी बड़ी कोठिया लगा ली वही सरकार के इस तंत्र के पास कुछ क्यों नही? आखिर ये पैसा जा कहाँ रहा है और महिलाओं का न आने का क्या कारण है? यह भी एक गहन विषय हो गया है। सरस केंद में पानी का कोई कन्वेक्शन न होने के बाद भी किसके आदेश से वहाँ पानी का कनेक्शन लगा यह विभाग को भी नही पता होगा। चितई मंदिर समिति भी इस भ्रस्टाचार से अछूती नहीं है। मंदिर समिति के लोग भी शादी के लिए आये लोगो को मंदिर से अपनी अपनी दुकानों का पता बताने रहते है। जबकी सरकार ने माहिलाओं और आने बाले लोगों के फायदे के लिए हि इस केन्द्र को खोला गया था। जो पानी सरस केंद को मिल रहा है वह पानी मंदिर के लिए सरकार ने दिया था। मंदिर में आने वालों को तो पानी की सुविधा कम मिल पाती है पर सरस बारात घर को बिना पैसे के पानी की पूरी सुविधा मिल रही है। आखिर कौन है इसके पीछे जो इतनी दबंगता से इसको चला रहे है? भ्रष्टाचार का खुलासा तब भी होता है जब एक विभाग जिला ग्राम विकास अभिकरण ने तो यह तक कह दिया की इस केंद्र के सभी कागजात और पूर्ण अभिलेख हवालबाग विकास खंड के पास है जब की विकास खंड के प्रमुख सूरज सिरडी ने ही सरस मार्किट के दस्तावेजों की पूछताछ सुरु की गई थी। और । आखिर क्या खेल है इस केंद का? हर कोई एक दुसरे के पास होने के खेल रहें है। जबकी सरकार ने इस केन्द्र को सी०डी०ओ के अन्दर रखा गया पर फिर बही कोई देखने वाला जक नही।

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