सरकार को माओवादियों का चैलेंज!

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अल्मोड़ा। सरकार के मुखिया ने पुलिस महकमे के सामने बैठकर उन्हें राज्य में माओवादी गतिविधियों पर नकेल लगाने का फरमान जारी किया था और इनका राज्य में नेटवर्क खत्म करने के लिए टास्क पफोर्स व खुफिया एजेंसियों को मैदान में उतारने के लिए डीजीपी को आदेश दिए थे। सरकार के मुखिया के आदेश के बावजूद पुलिस व खुफिया एजेंसियां माओवादियों के नेटवर्क को भेदने में पूरी तरह से फेल दिखाई दे रही है। सीएम ने जहां माओवादियों का नेटवर्क भेदने का हुक्म जारी किया था वहीं माओवादियों ने सरकार को खुली चुनौती देते हुए एक बार फिर अल्मोड़ा में सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हुए राज्य में पूर्ण शराब बंदी लागू करने, युवाओं को रोजगार व बेरोजगारी भत्ता देने के साथ ही राज्य को पूर्ण नशा मुक्त बनाने तथा शराब के खिलाफ लड़ाई लड़ने का चैलेंज दिया है। माओवादियों के इस चैलंेज से सरकार व पुलिस महकमा कटघरे मंे आ कर खड़ा हो गया है और सवाल उठ रहे है कि आखिरकार प्रदेश का पुलिस महकमा व खुफिया एजेंसियां इतनी लचर कैसे हो गई जो माओवादियों का नेटवर्क तोड़ने में बार बार नाकाम सबित हो रही है।

विधानसभा चुनाव के बाद कुछ समय की चुप्पी को तोड़ते हुए फिर माओवादी पोस्टरों व दीवार पर लाल लेखन ने प्रशासन की नींद हराम कर दी है। अबकी बार द्वाराहाट के बग्वालीपोखर, बिंता आदि क्षेत्रों में शराबबंदी को लेकर नारे लिखे गये हैं।

द्वाराहाट क्षेत्र के बिंता, बग्वालीपोखर के विभिन्न इलाकों में विवादित नारे लिखे हैं। हालांकि नारों में शराब का विरोध किया गया है, लेकिन यह अपील भाकपा माओवादी की ओर से जारी की गई है, जिससे हड़कंप मच गया है। विवादित पोस्टरों मंे शराब की दुकानों में धावा बोलकर आग लगाने जैसी विवादित टिप्पणियां लिखी गयी है। द्वाराहाट क्षेत्र में इस प्रकार के पोस्टर लगे होने के बाद हरकत मंे आये प्रशासन और राजस्व टीम मौके पर पहुंच इन पोस्टरों को हटा दिया है। खूफिया एजेंसिया भी सतर्क हो गयी हैं। इस क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन के जोनल कमेटी द्वारा जारी पर्चे भी फेंके गये हैं। जिसमें शराब विरोधी आंदोलनों को पूर्ण समर्थन देने और नशा हटने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही गयी है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी इसी प्रकार की विवादित गतिविधियों ने प्रशासन को काफी परेशान किया था तब सोमेश्वर विधानसभा के विभिन्न हिस्सांे में इस प्रकार की घटनाएं प्रकाश में आयी थीं। जानकारी के अनुसार रविवार की सुबह क्षेत्र वासियों ने राजस्व पुलिस और प्रशासन को विभिन्न क्षेत्रों में दिवारों मे लिखे गये नारों और फेंके गये पर्चों की जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद राजस्व और पुलिस की टीमे मौके पर पहुंच गयी। लगातार माओवादियों द्वारा सरकार को लगातार दिया जाने वाला झटका सरकार की नाकामी को साफ दिख रही है। मुख्यमंत्री के पास रक्षा मंत्रालय होने की बाद भी प्रदेश में जो घटनाए लगातार हो रही है इससे साफ पता लगता है कि जनपद की सुरक्षा व्यवस्था का क्या हाल है। जनपद में वाहनों की चलन और यातायात व्यवस्था तक ही रह गया है जनपद कहा है प्रसाशन की ख़ुफ़िया एजंसियां क्या कर रही है ये सब इन घटनाव से साफ पता चल जाता है। क्या प्रशासन अब के पास यातायात सत्यापन और नेताओ की गाड़ी के आगे चलने का ही काम रह गया है। इससे पहले भी माओवादियों ने सोमेश्वर में और फिर धारी में प्रशासन की जीप को तक आग के हवाले कर दिया था पर उसके बाद भी प्रशासन कुछ नही कर पाया। बीजेपी पहले कांग्रेश की सर्कार का हवाला दे रही थी पर अब उसको सर्कार होने पर वो खुद कहा है ये बताए। जनता को क्या माओवादियो से निजात मिल भी पाएगी या मुख्यमंत्री जी बस पुलिस के अधिकारियो का तबादला ही कर पाएगी। जनपद में जिसे के काम की लिए आने वाली लेवर कहा से आती है वो दोनों जगह नेपाल और पश्चिम बंगाल से आती है क्या कभी इनका सत्यापन हो पाया है कहा चला जाता है प्रशासन इनके सत्यापन में इनके पास जो नो होते है वो किस नाम के है पता करे पगले पुलिस?

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