मायावती का हमला- BSP की छवि खराब करने की कोशिश

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मायावती का हमला- BSP की छवि खराब करने की कोशिश

मायावती का हमला- BSP की छवि खराब करने की कोशिश:-दिल्ली में ईडी द्वारा दिल्ली के एक बैंक में छापामारी कर मायावती के भाई और बसपा के एकाउंट में करोड़ों रुपए का पता लगाने के बाद आज मायावती ने पलटवार करते हुए कहा कि BSP ने नियमों के मुताबिक खाते में पैसा जमा कराया है.

उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए देशभर से जमा कराए थे. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकारी कार्रवाई का जवाब देते हुए मायावती ने कहा, ‘अगस्त महीने के दौरान मेंबरशिप का पैसा आया, उस समय मैं देशभर के दौरे पर थी. मेंबरशिप के लिए बड़े नोट सदस्यों ने जमा कराए. लेकिन पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है. नोटबंदी पर मेरे बयान से बीजेपी की नींद उड़ गई है. हमारी पार्टी कार्यकर्ताओं ने पैसा जमा कराए हैं और हमारे पास एक-एक पैसे का हिसाब है.’

बीजेपी सहित अन्य पार्टियों ने भी अपना पैसा बैंक में जमा कराया

मायावती ने अपने भाई के बैंक एकाउंट में भारी रकम पाए जाने पर दी सफाई देते हुए कहा कि बीएसपी के प्रभावशाली लोगों को परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मेरा भाई कारोबारी है और उसे परेशान किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर जो परेशान कर रहे हैं, उनकी दलित विरोधी और जातिवादी मानसिकता साफ उजागर हो जाती है.उन्होंने कहा कि इस दौरान बीजेपी सहित अन्य पार्टियों ने भी अपना पैसा बैंक में जमा कराया है, लेकिन उसकी चर्चा नहीं होती. बीजेपी और अन्य पार्टियों ने 8 नवंबर के बाद बैंक एकाउंट में जो पैसा जमा कराया है, उसका ब्योरा दें.

नोटबंदी के पहले जमा कराया

उन्होंने कहा कि ये  पार्टी का पैसा है जो ईमानदारी से और नोटबंदी के पहले जमा कराया गया है. लेकिन बीजेपी के इशारे पर हमारी छवि खराब खराब करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा, ‘बीएसपी ने नियमों के मुताबिक ही एकत्रित धनराशि को हमेशा की तरह बैंक में जमा कराया है. ये पार्टी का पैसा है, इसे फेंक दूं ? हमारे एक-एक पैसे का हिसाब है. बीजेपी सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर बीएसपी और उसकी प्रमुख मायावती की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है.

बीएसपी की अकेली सरकार

उन्होंने कहा, ‘ यूपी में इस बार भी साल 2007 की तरह पूर्ण बहुमत की सरकार बनने जा रही है. साल 2007 में मेरे परिवार और रिश्तेदारों के खिलाफ इससे भी कई गुना ज्यादा घिनौनी हरकते की थीं. तब भी केंद्र में बीजेपी सरकार थी और उसने मेरे खिलाफ आय से अधि‍क संपत्ति के मामले को चुनावी मसला बनाया था. लेकिन तब यूपी की जनता ने इनके आरोपों को नकार कर बीएसपी की अकेली सरकार बनाई. इसी तरह इस बार भी बीजेपी ऐंड कंपनी को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होगा.

बीजेपी ने कहा, हताश हैं मायावती

बीजेपी नेता उदित राज ने मायावती के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इतनी हताशा में क्यों ? उन्हें इतनी चिंता क्यों ? उदित राज ने कहा कि जांच से पूरा मामला साफ हो जाएगा.

गौरतलब है कि दिल्ली के करोल बाग में ईडी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में सोमवार की सुबह छापेमारी की थी. ईडी को यूनियन बैंक की शाखा में दो ऐसे बैंक खाते मिले जिसमें करोड़ों रुपये जमा किए गए थे. उसमें एक खाता मायावती के भाई आनंद के नाम था, जिसमें ईडी को एक करोड़ 43 लाख रुपए मिले. साथ ही दूसरा खाता बहुजन समाज पार्टी के नाम पर था जिसमें ईडी को लगभग 104 करोड़ रुपये मिले.

इनकम टैक्स विभाग यह जांच करेगा

इन दोनों खातों में रकम 8 नवंबर यानी नोट बंदी के बाद जमा की गई और ये पैसे टुकड़ों में जमा किए गए. प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले की जानकारी इनकम टैक्स विभाग को दे दी है. अब इनकम टैक्स विभाग यह जांच करेगा कि इन दोनों खातों में मौजूद रकम कितनी सही है. क्या यह रकम कालाधन तो नहीं. अभी तक इस मामले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ और ना ही कोई गिरफ्तारी हुई है.ईडी के यूनियन बैंक के इस ब्रांच के दो खातों में नोटबंदी की घोषणा के बाद संदिग्ध रूप से अत्यधिक मात्रा में पैसा जमा होने की खबर मिली थी.

सूत्रों की मानें तो यूबीआई की इस ब्रांच में हर रोज 15 से 20 करोड़ रुपये जमा हो रहे हैं, जिसके बाद ये दबिश दी गई. ईडी ने बैंक से इन दो खातों का पूरा ब्योरा मांगा है और बैंक अधिकारियों से बैंक के अंदर लगे सीसीटीवी फुटेज और बैंक खातों के केवाईसी दस्तावेज देने के लिए भी कहा है.

मायावती के भाई जांच के घेरे में

दरअसल आयकर विभाग को को कई गुप्त जानकारियां मिली थीं कि आनंद कुमार कई बेनामी संपत्तियां जमा किए हुए हैं. जांच कड़ी में आयकर विभाग ने नोएडा के कई बिल्डर्स को नोटिस भेजा है. मायावती के भाई आनंद कुमार पर आरोप है कि उन्होंने प्राइवेट बिल्डरों के साथ गठजोड़ से बेनामी संपत्तियां बनाई हैं. बिल्डरों के आनंद कुमार के साथ संबंध है और उन्होंने उनकी आवास परियोजनाओं में खूब कालेधन निवेश किया है. आयकर विभाग ने इन बिल्डरों से जमीनों के संबंध में जानकारी मांगी है.

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